बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के तहत महाविद्यालयों को नए विश्वविद्यालयों में शामिल किए जाने के विरोध में शिक्षक-कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन।

बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के तहत महाविद्यालयों को नए विश्वविद्यालयों में शामिल किए जाने के विरोध में शिक्षक-कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन।

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संवाददाता: रितिक राज वर्मा

पटना, 01 अक्टूबर 2026। बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के तहत माता सीता महिला विश्वविद्यालय एवं दिनकर विश्वविद्यालय के गठन तथा पुराने विश्वविद्यालयों के अंगीभूत महाविद्यालयों को इन नए विश्वविद्यालयों में शामिल किए जाने के विरोध में आज श्री अरविन्द महिला कॉलेज, काजीपुर, पटना में शिक्षक एवं कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में बैठक एवं धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।कार्यक्रम में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों के बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी शामिल हुए। श्री अरविन्द महिला कॉलेज, जेडी वीमेंस कॉलेज, गंगा देवी महिला कॉलेज, खगौल महिला कॉलेज, बी.डी. कॉलेज, कॉमर्स कॉलेज, टी.पी.एस. कॉलेज, बी.एस. कॉलेज सहित अन्य महाविद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। श्री अरविन्द महिला कॉलेज की बड़ी संख्या में छात्राओं ने भी धरना-प्रदर्शन में सक्रिय भागीदारी की।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रिया कुमारी ने किया, जबकि पूरे आंदोलन का नेतृत्व प्रो. संतोष कुमार ने किया। इस अवसर पर प्रो. साधना ठाकुर, श्री रोहित कुमार एवं श्री वेंकटेश जी सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

प्रदर्शन में बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के तहत पुराने एवं स्थापित महाविद्यालयों को नए विश्वविद्यालयों में शामिल किए जाने का व्यापक विरोध किया गया। विशेष रूप से पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के अंगीभूत महिला महाविद्यालयों को माता सीता महिला विश्वविद्यालय में शामिल किए जाने के निर्णय पर आपत्ति जताई गई।इस अवसर पर प्रो. संतोष कुमार ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थागत विकास के लिए विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता एवं स्वायत्तता अनिवार्य है। विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को बार-बार कमजोर करने वाले निर्णयों की उन्होंने निंदा करते हुए कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों से पहले शिक्षक, कर्मचारी एवं अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक विमर्श होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्थापित महाविद्यालयों की संस्थागत पहचान और शैक्षणिक हितों को प्रभावित करने वाले निर्णयों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। शिक्षक एवं कर्मचारी समुदाय लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेगा।

प्रो. संतोष कुमार ने कहा कि यदि सरकार इन निर्णयों पर पुनर्विचार नहीं करती है, तो विरोध-प्रदर्शन का यह दौर आगे भी जारी रहेगा और आंदोलन को चरणबद्ध रूप से व्यापक किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि संवाद एवं लोकतांत्रिक माध्यमों से समाधान नहीं निकलने की स्थिति में कानूनी लड़ाई अंतिम विकल्प होगी।

कार्यक्रम के पश्चात शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों एवं छात्राओं ने काला बिल्ला लगाकर धरना-प्रदर्शन किया और संबंधित निर्णयों पर पुनर्विचार की मांग की।

शिक्षक एवं कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने कहा कि उच्च शिक्षा की स्वतंत्रता, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, संस्थागत पहचान और विद्यार्थियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

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