श्री अरविंद महिला कॉलेज में सजा कजरी महोत्सव (वर्षा मंगल 2026) में लोकसंगीत, नाट्य और पौधारोपण से दिया संस्कृति-प्रकृति संरक्षण का संदेश।

श्री अरविंद महिला कॉलेज में सजा कजरी महोत्सव (वर्षा मंगल 2026) में लोकसंगीत, नाट्य और पौधारोपण से दिया संस्कृति-प्रकृति संरक्षण का संदेश।

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संवाददाता: रितिक राज वर्मा 

पटना, 21 सितंबर 2026। श्री अरविंद महिला कॉलेज, पटना में सोमवार को ‘कजरी महोत्सव (वर्षा मंगल) 2026’ का आयोजन किया गया। महोत्सव में कजरी के लोकसुरों के माध्यम से वर्षा ऋतु, प्रकृति, लोकजीवन और बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय परिसर स्थित श्री अरविंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद महाविद्यालय के हर्बल गार्डन में पौधारोपण किया गया। तत्पश्चात सभागार में कजरी महोत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से वर्षा और प्रकृति से जुड़े लोकभावों को अभिव्यक्ति दी गई।

कार्यक्रम में श्रीमती रूबी, निदेशक (सांस्कृतिक कार्य), कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि कजरी हमें प्रकृति और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती है। वर्षा, मेघ, हरियाली और ग्रामीण जीवन की संवेदनाएँ कजरी के लोकगीतों में जीवंत होती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को बिहार की लोककलाओं और परंपराओं से जुड़ने तथा उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) रेखा रानी ने कहा कि प्रकृति भारतीय कला, साहित्य और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। कजरी प्रकृति के साथ मनुष्य के आत्मीय संबंध को लोकसंगीत के माध्यम से अभिव्यक्त करती है। उन्होंने कहा कि हर्बल गार्डन और कजरी महोत्सव इसी प्रकृति-संवेदना के दो रूप हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी आधुनिक तकनीक के साथ परंपरा और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। भौतिकता के दौर में कजरी हमें पुनः प्रकृति से जुड़ने का संदेश देती है।

महोत्सव के दौरान छात्राओं द्वारा विभिन्न कजरी एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। प्रस्तुतियों में वर्षा ऋतु, प्रकृति, लोकजीवन और मानवीय संवेदनाओं की विविध छवियाँ दिखाई दीं।कार्यक्रम का आयोजन संगीत विभाग के नेतृत्व में संगीत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी शर्मा के निर्देशन में किया गया। छात्राओं की प्रस्तुतियों ने बिहार की लोकसंगीत परंपरा के प्रति उनके उत्साह और रचनात्मक प्रतिभा को सामने रखा। कार्यक्रम में प्रो. साधना ठाकुर, प्रो. शिवनारायण सिंह, प्रो. विमी सिंह, प्रो. राजीव शंकर सिन्हा, डॉ. नोरा निवेदिता शॉ सहित महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं।महोत्सव के साथ विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। डॉ. लता कुमारी के नेतृत्व में महाविद्यालय के हर्बल गार्डन में पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम में दो नाटकों की प्रस्तुति भी हुई, जिनके माध्यम से सामाजिक एवं पर्यावरणीय संवेदनाओं को रचनात्मक ढंग से अभिव्यक्त किया गया।कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की बर्सर डॉ. अनामुला सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, प्राचार्या, शिक्षकगण, आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों एवं छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, लोककला और प्रकृति से जोड़ने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को भी मंच प्रदान करते हैं।

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