सद्गुरु कबीर ने मानवीय धर्म को स्थापित किया, महंत ब्रजेश मुनि सद्गुरु कबीर साहेब का 628 वो प्राकट्य दिवस।
सद्गुरु कबीर ने मानवीय धर्म को स्थापित किया, महंत ब्रजेश मुनि सद्गुरु कबीर साहेब का 628 वो प्राकट्य दिवस।
संवाददाता: रितिक राज वर्मा
पटना। कबीरपंथी आश्रम मीठापुर में दिनांक 20 जून 2026 को सद्गुरु कबीर साहेब का 628 वो प्राकट्य दिवस महंत ब्रजेश मुनि जी महाराज के सानिध्य में मनाया गया। आश्रम के महिला मंडल द्वारा कबीर भजन की प्रस्तुति की गयी।

मरंच ब्रजेश मुनि ने सत्संग का आरंभ करते हुए कहा सद्गुरु कबीर साहेब का प्राकट्य ऐसे समय में मध्यकाल में हुआ जब समाज में भेद-भाव, छुआछूत, आडम्बर, अंधविश्वास बढ़ा हुआ था। मुगलों का शासन भी धार्मिक कट्टरता से मानव जीवन मूल्य को प्रभावित कर रहा था। सद्गुरु कबीर साहेब ने के बीच व्याप भेद भाव को मिटाकर समाज में मानव मानव सभी मनुष्य को एक समान बताया। बताया। संसार में एक स्त्री पुरुष दो ही जाति की धारणा के प्रति जन ज़न को जागरूक किया। अंधविश्वास से ऊपर उठकर मानवीय धर्म को स्थापित करने के लिए हिन्दू-मुसलमान दोनों को उपदेश दिया।
अव्वल अल्लाह नूर उपाइया। कुदरत के सब बन्दे l एक नूर ते सब जग उपजा कौन भले कौन मंदे l आज समाज और राष्ट्र में ऊंच नीच, भेद भाव, विषमता, अन्धविश्वास और आडम्बर जिस रूप में बढ़ा हुआ है, उसमे व्यावहारिक है। सदगुरु कबीर साहेब का उपदेश अत्यंत प्रासंगिक और व्यावहारिक है l योग विशेषज्ञ हृदय नारायण झा ने कहा योग दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित यह उत्सव सद्गुरु कबीर साहेब के सहज साधना के प्रति हम सभी का ध्यान खींचता है।

सद्गुरु कबीर साहेब ने योग, प्रेम और भक्ति का उपदेश अपनी वाणी में दिया है। इस वर्ष योग दिवस का विषय है स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग । सदगुरु कबीर साहेब के सहज योग में स्वस्थ जीवन का सम्यक मार्गदर्शन है। सद्गुरु कबीर साहेब स्वयं ११९ वर्ष का स्वस्थ जीवन जीकर निर्वाण को प्राप्त किये। सद्गुरु कबीर साहेब के योग का सार सबके लिए है, तन थिर मन थिर वचन थिर सुरत निरत थिर होय। इस अवसर पर लंगर भण्डारा का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने देर रात प्रसाद ग्रहण किया l समारोह में किसान नेता संजीव यादव, महेंद्र ,संत अशोक दास हंस, महंत, कर्षण मुनि, संत नवीन दास, सज्जन कुमार, डॉ इंद्रजीत,साहिल यादव ने भी उद्गार व्यक्त किया l