“Art in Hands, Heritage in Heart” Traditional Art, Nurturing Creativity, Empowering Skills UGC Extension Outreach Programme के अंतर्गत अंतर-महाविद्यालयीय मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन।

“Art in Hands, Heritage in Heart” Traditional Art, Nurturing Creativity, Empowering Skills UGC Extension Outreach Programme के अंतर्गत अंतर-महाविद्यालयीय मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन।

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संवाददाता: रितिक राज वर्मा 

पटना, 11 अगस्त 2026। श्री अरविंद महिला कॉलेज, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना के गृह विज्ञान विभाग द्वारा UGC Extension Outreach Programme के अंतर्गत “Art in Hands, Heritage in Heart” थीम पर एक अंतर-महाविद्यालयीय मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का शुभारंभ 11 अगस्त 2026 को पूर्वाह्न 10:00 बजे गृह विज्ञान विभाग में हुआ। प्रतियोगिता में विभिन्न महाविद्यालयों से कुल 23 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस प्रतियोगिता में श्री अरविंद महिला कॉलेज, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मगध महिला कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय तथा जे.डी. विमेंस कॉलेज, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय की छात्राओं ने सहभागिता की। विभिन्न संस्थानों की छात्राओं की सहभागिता ने प्रतियोगिता को वास्तविक अंतर-महाविद्यालयीय स्वरूप प्रदान किया तथा छात्राओं को अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता एवं कलात्मक कौशल के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय पारंपरिक कला एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ छात्राओं में रचनात्मकता, कलात्मक अभिव्यक्ति, कौशल विकास, आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ावा देना था। मेहंदी जैसी पारंपरिक कला को कौशल विकास, उद्यमिता एवं स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को यह समझने का अवसर मिला कि पारंपरिक कलाएं केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इन्हें आधुनिक कौशल एवं उद्यमिता से जोड़कर रोजगार एवं आत्मनिर्भरता के अवसरों में भी परिवर्तित किया जा सकता है। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों, शिक्षिकाओं एवं प्रतिभागी छात्राओं के स्वागत के साथ हुई। प्रतियोगिता में छात्राओं ने पूरे उत्साह एवं उमंग के साथ भाग लेते हुए आकर्षक एवं कलात्मक मेहंदी डिजाइनों के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पारंपरिक बेल-बूटे, फूल-पत्तियां, ज्यामितीय आकृतियां तथा आधुनिक मेहंदी डिजाइनों का सुंदर समन्वय प्रतियोगिता का विशेष आकर्षण रहा। छात्राओं ने अपनी कल्पनाशीलता, सूक्ष्म कलात्मक कौशल एवं सौंदर्यबोध का प्रभावी प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. विमी सिंह ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि मेहंदी केवल हाथों को सजाने की कला नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति एवं समृद्ध पारंपरिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ छात्राओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा को पहचानने तथा उसे व्यावहारिक कौशल में परिवर्तित करने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि पारंपरिक कलाओं को कौशल विकास, उद्यमिता एवं स्वरोजगार से जोड़कर छात्राओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाया जा सकता है।

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रेखा रानी ने छात्राओं की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की पहचान हमारी लोक एवं पारंपरिक कलाओं में निहित है। मेहंदी जैसी कला हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि “Art in Hands, Heritage in Heart” केवल एक थीम नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति एवं विरासत को संजोते हुए नई रचनात्मक संभावनाओं की ओर बढ़ने का संदेश है। उन्होंने छात्राओं को पारंपरिक कलाओं को आधुनिक कौशल, उद्यमिता एवं रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. नोरा निवेदिता शॉ, डॉ. सपना बरुआ एवं डॉ. वेली सिन्हा शामिल रहीं। निर्णायकों द्वारा प्रतिभागियों का मूल्यांकन डिजाइन की रचनात्मकता, मौलिकता, स्वच्छता, सौंदर्य, कलात्मक अभिव्यक्ति तथा पारंपरिक तत्वों के प्रभावी प्रयोग के आधार पर किया गया। निर्णायकों ने छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनकी रचनात्मक प्रतिभा एवं कलात्मक कौशल को प्रोत्साहित किया।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार आयुषी कुमारी एवं शाकरा परवीन, द्वितीय पुरस्कार ज्योति सिंह एवं खुशी कुमारी, तृतीय पुरस्कार कविता रानी एवं शोभा भारती तथा सांत्वना पुरस्कार अंशु कुमारी को प्रदान किया गया। विजेता छात्राओं को उनकी उत्कृष्ट रचनात्मकता, मौलिकता एवं कलात्मक प्रस्तुति के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में प्रो. साधना ठाकुर, प्रो. पुष्पा रॉय एवं डॉ. रेनू रानी की उपस्थिति रही। उन्होंने प्रतिभागी छात्राओं की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया तथा भारतीय पारंपरिक कला एवं रचनात्मक कौशल को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमापूर्ण एवं प्रेरणादायक बनाया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं सुचारु संचालन में नैंसी कुमारी एवं रानी कुमारी की सक्रिय भूमिका एवं सहयोग रहा। उन्होंने प्रतियोगिता के आयोजन, प्रतिभागियों के समन्वय, व्यवस्थाओं एवं कार्यक्रम के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके सहयोग से प्रतियोगिता का आयोजन व्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

विभिन्न महाविद्यालयों से आई छात्राओं की सहभागिता ने कार्यक्रम को अधिक व्यापक एवं सार्थक बनाया। प्रतियोगिता ने छात्राओं को न केवल अपनी कलात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया, बल्कि विभिन्न संस्थानों की छात्राओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, रचनात्मक संवाद एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा दिया। इस प्रकार के अंतर-महाविद्यालयीय कार्यक्रम छात्राओं को विभिन्न संस्थानों की प्रतिभाओं के साथ संवाद करने तथा नए विचारों एवं कलात्मक तकनीकों को सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।

मेहंदी प्रतियोगिता ने छात्राओं में रचनात्मक सोच, आत्मविश्वास, कलात्मक कौशल, सौंदर्यबोध एवं व्यावहारिक दक्षता को विकसित करने के साथ-साथ भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि पारंपरिक कला को आधुनिक कौशल एवं उद्यमिता से जोड़कर इसे रोजगार एवं आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बनाया जा सकता है। UGC Extension Outreach Programme के अंतर्गत आयोजित यह पहल छात्राओं के समग्र विकास, कौशल संवर्धन एवं सांस्कृतिक जागरूकता की दिशा में एक सार्थक प्रयास रही।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। प्रतियोगिता उत्साहपूर्ण, रचनात्मक एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। सभी प्रतिभागियों, निर्णायकों, शिक्षिकाओं एवं सहयोगी सदस्यों के योगदान से कार्यक्रम सफल एवं प्रभावी रहा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य संदेश दिया गया “हाथों में कला, हृदय में विरासत, रचनात्मकता से कौशल और कौशल से आत्मनिर्भरता की ओर।”

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