NCE Chandi कॉलेज में छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल: प्राचार्य और प्रशासन पर आरोप, कार्रवाई की मांग।

NCE Chandi कॉलेज में छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल: प्राचार्य और प्रशासन पर आरोप, कार्रवाई की मांग।

संवाददाता रितिक राज वर्मा

नालंदा। NCE Chandi कॉलेज में 2024 बैच की छात्रा सोनम की मौत का मामला गंभीर प्रशासनिक और सुरक्षा लापरवाही का उदाहरण है। जानकारी के अनुसार दिनांक 24 सितंबर 2025 को सोनम (सिविल इंजीनियरिंग की छात्रा) लड़कियों के हॉस्टल की छत से गिर गई थी, लेकिन प्राचार्य डॉ. गोपाल नंदन ने उसे हॉस्टल से बाहर नहीं निकलने दिया और न ही मेडिकल इमरजेंसी के लिए अपनी गाड़ी देने को तैयार हुए।

घायल लड़की करीब 30 मिनट तक तड़पती रही, इस बीच किसी फैकल्टी या प्राचार्य ने मदद नहीं की और सभी मौके से चुपचाप चले गए। प्रशासन ने भी कोई सक्रियता नहीं दिखाई, 30 मिनट बाद आई एंबुलेंस से उसे अस्पताल भेजा गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

कॉलेज के छात्रों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताया, बड़े स्तर पर प्रोटेस्ट हुआ, जिसमें DSP की गाड़ी तोड़ दी गई और एक स्कूटर भी जला दिया गया।

छात्रों की मांग थी कि डॉ. गोपाल नंदन तुरंत मौके पर आएं, पर उन्होंने कमेंट करने से भी इंकार कर दिया। नालंदा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, चंडी में इससे पहले भी रैगिंग का बड़ा मामला सामने आ चुका है, जिसमें कई छात्रों के नाम दर्ज हैं।

छात्राओं को मानसिक तनाव, धमकी और दबाव में रखा जाता है, ऐसी शिकायतें बार-बार सामने आई हैं। विशेषकर प्राचार्य स्तर पर छात्रों की शिकायतों को दबाने की कोशिश की जाती है, जिससे कॉलेज का माहौल खराब होता जा रहा है। फैकल्टी और कॉलेज व्यवस्थापन इस पूरे मामले में कॉलेज प्रशासन की निष्क्रियता और संवेदनहीनता स्पष्ट रूप से उजागर होती है। न तो समय पर मेडिकल सुविधा, न ही फैकल्टी या प्रशासनिक सपोर्ट दिया गया। घटना के बाद सभी जिम्मेदार अधिकारियों ने खुद को बचाने की कोशिश की, और प्रशासन ने भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की।

हादसे के बाद पूरे कॉलेज परिसर में डर और गुस्से का माहौल है, छात्र-छात्राओं के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। NCE Chandi नालंदा, बिहार का सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज है, जिसमें डॉ. गोपाल नंदन वर्तमान प्राचार्य हैं।

बीते कुछ समय में कॉलेज प्रशासन को लेकर कई विवाद और शिकायतें सामने आई हैं। यह घटना बेटियों की सुरक्षा, कॉलेज प्रशासन की जवाबदेही, और शिक्षा संस्थानों में आपातकालीन मदद जैसे जरूरी मुद्दों को उजागर करती है।

प्रशासनिक निष्क्रियता के चलते नियमन, जवाबदेही, और छात्र सुरक्षा पर तत्काल एक्शन जरूरी है।

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