तेजस्वी बनाम चुनाव आयोग: वोटर लिस्ट विवाद ने पकड़ा तूल, सम्राट चौधरी ने लगाया दोहरी पहचान का आरोप
पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों वोटर लिस्ट को लेकर जबरदस्त घमासान छिड़ा हुआ है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने जहां अपना नाम वोटर लिस्ट से कटने का दावा करते हुए चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला, वहीं अब डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने पलटवार करते हुए पूरे मामले को “दोहरी पहचान” और “फर्जीवाड़े” का मुद्दा बना दिया है।
तेजस्वी का आरोप: “मेरा नाम ही हटा दिया गया”
पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने चौंकाने वाला दावा किया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। उन्होंने तीखे तेवर में कहा,
“अगर मेरा नाम लिस्ट से कट सकता है, तो सोचिए बिहार के लाखों गरीबों का क्या हाल होगा!”
तेजस्वी ने चुनाव आयोग को “गोदी आयोग” करार देते हुए यह भी कहा कि आयोग को दो गुजराती नेताओं का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि हर बूथ की हटाई गई सूची सार्वजनिक की जाए और इसे लोकतंत्र के लिए “खतरनाक साजिश” करार दिया।
सम्राट का पलटवार: “तेजस्वी खुद फंसे, दो EPIC नंबर क्यों?”
तेजस्वी के आरोपों पर चुनाव आयोग और पटना प्रशासन पहले ही खंडन कर चुके हैं, लेकिन डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने शनिवार को मोर्चा खोलते हुए कहा:
“तेजस्वी ने दो जगहों पर नाम जुड़वाया है। यह कानूनन अपराध है और इसकी जांच होनी चाहिए।”
सम्राट ने सबूत के तौर पर तेजस्वी के वोटर आईडी डिटेल्स साझा करते हुए कहा कि वे 2015 से 2025 तक लगातार दीघा विधानसभा क्षेत्र से EPIC नंबर RAB0456228 पर वोट डालते आ रहे हैं।
उन्होंने अलग-अलग चुनावों में तेजस्वी के बूथ और सीरियल नंबर की सूची भी जारी की:
2015 – बूथ: 150, सीरियल: 605
2020 – बूथ: 160, सीरियल: 511
2021 – बूथ: 171, सीरियल: 489
2025 (जनवरी) – बूथ: 171, सीरियल: 481
2025 (1 अगस्त) – बूथ: 204, सीरियल: 416
इसके बाद सम्राट चौधरी ने बड़ा सवाल खड़ा किया —
“अब तेजस्वी जिस EPIC नंबर RAB2916120 की बात कर रहे हैं, वो कहां से आया? क्या उनके पास दो वोटर कार्ड हैं?”
उन्होंने इसे सिर्फ तेजस्वी का ही नहीं, बल्कि पूरे आरजेडी संगठन का “सुनियोजित फर्जीवाड़ा” बताया और इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। जहां तेजस्वी यादव इसे लोकतंत्र की हत्या करार दे रहे हैं, वहीं सम्राट चौधरी इसे “धोखा और साजिश” बता रहे हैं। अब सबकी नजर चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
क्या यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाज़ी बनकर रह जाएगा, या फिर जांच के बाद कोई बड़ा खुलासा होगा — ये आने वाला समय तय करेगा।